मानवता - एक गाथा

 दिमाग में चक्कर काट गई एक बात, 

क्यों लोग करते पीछे से बात, 

क्यों वे करते बात टेढ़ी खीर से, 

क्यों नहीं कहते हैं वे साफ दिल से।



दिमाग में चक्कर काट गई एक बात, 

क्यों लोग दूसरों की खुशी में खुश नहीं होते,

क्यों दुःख में सबको झूठी संवेदना हैं देते,

क्या इतनी स्वाभीमानी है मानवता,

क्या कलियुग है जिम्मेवार जो,

झूठी शान का प्रदर्शन हैं करते।



दिमाग में चक्कर काट गई एक बात,

क्यों लोग जाने समझे बिना अपनी राय देते,

क्यों लोग दूसरों से वैर हैं करते,

क्यों लोग जीवन सरल सलीके से न जीते,

क्यों लोग माया जाल में फँसकर रह जाते ?



यह अहं मनुष्य का करता नाश, 

जिसके कारण करता अपने जीवन का विनाश,

जीवन है दूसरों का दूर करना कष्ट,

जिससे मिलती असीम खुशी वह काम है सर्वश्रेष्ठ।



नकारात्मक सोच करती उथल-पुथल जीवन में,

देती है भटका हमें अपने लक्ष्य से जीवन में,

यह बातें हमारा दिमाग कर लेती हैं वश में,

मनुष्य को सोचने न दे आगे जीवन में।



नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति रह जाता अकेला जीवन में,

न कोई खुशी केवल गम ही गम है जीवन में,

मस्त रहता वह अपने अकेलेपन के जीवन में,

परन्तु रह जाता अकेला जीवन में।



जिसने छोड़ी दिखावे की प्रवृत्ति,

सच्चा मनुष्य वह कहलाया, 

जिसने पूजा अपने गुरु एवं माता-पिता को, 

छोड़ी माया, चला आदर्शों पर, उसने

दूसरों को सच्ची मानवता का पाठ पढ़ाया ।


स्व - रचित पंक्तियां।

यह मेरी सर्व - प्रथम मौलिक रचना है, जो मैंने बाहरवीं कक्षा में लिखी थी

It's a struggle, have high moral values which will take you somewhere else at a beautiful place.🦋


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