लॉकडाउन एवं सृजनात्मकता

संकट की इस घड़ी में ना घबराना,

प्रभु का गुणगान करते रहना,

स्वच्छता का नियम कोरोना ने बतलाया,

हमें इसका पालन जरूर है करना।

हाथ मिलाने से अब हमें है बचना,

नमस्ते करके ही स्वागत करना,

मुंह पर हाथ लगाने से बचना,

हाथों को तुम ऐसे धोना,

कि छूटे ना इसका एक भी कोना,

और बीस सेकेंड तक इन्हें साफ करना।


व्यस्त जीवन से समय परिवार के लिए मिला,

मां का चेहरा भी तो बड़े दिन बाद खिला,

पिताजी ने रसोई में मां का हाथ बंटाया,

और अपने अनुभवों को दोहराया।

साथ मिलकर पुराने खेल खेलना,

कुछ यादें पुरानी ताज़ा करना,

व्यायाम ,प्राणायाम नित्य करते रहना,

प्रातः शीघ्र उठना भूल ना जाना,

हो आवश्यक जब,

तो सारे सज - संवर कर ना चल देना,

किसी एक को ही इसका भार सौंपना।


उम्मीद की किरण अब ना छोड़ना,

विभिन्न कार्यों में अपनी रुचि दिखाना,

 अपने टैलेंट को अब निखारना,

ऑनलाइन माध्यम से कार्य जारी रखना,

आंखों का भी ध्यान रखना,

किताबी क्रीड़ा को भूल ना जाना,

प्रकृति का उज्ज्वल रूप देखना,

निरभ्र प्राची का सवेरा होने देना,

हे श्रेष्ठ मानव अधीर ना होना,

निष्ठुर समय में धैर्य ना त्यागना,

लोकडाउन का सख्ती से पालन करना,

और वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश देना।


यह मेरी स्व - रचित कविता है जो मैंने 8 मई, 2020 को प्रतियोगिता के लिए लिखी थी।

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