गुरु पूर्णिमा विशेष अंक।
है वाणी में आपके ज्ञान का तेज़ प्रखर,
ज्ञान का सौंदर्य आता मुख पर,
मानो सूरजमुखी खिला हो धरती पर,
रुख करता प्रत्येक छात्रा की ओर,
कद - काठ खड़ा अपने ज्ञान के बल पर,
शरीर कितना ही थका हो पर,
छोड़कर हर पीड़ा कमरे के बाहर,
वे पढ़ाते हमें बनाने के लिए विद्वान, इस धरती पर,
प्रेरित करते पढ़ने के लिए, न बोझ लेकर दिल पर,
आनंद लेना सिखाते प्रत्येक नीरस पाठ में जोश भरकर,
लीन कर लेते हमें स्वयं के भीतर,
जैसे कमल के पत्ते ने पानी को अपने अंदर।।
विशेष अंक गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अपने सभी गुरुओं के लिए 🙏🏻🙏🏻
यह मेरी स्व - रचित पंक्तियां हैं।
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