निबंध : कोविड19 स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य।
Covid-19 : स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य
संकर की इस घड़ी में न घबराना,
रचनात्मक कार्यों में संलग्न रहना,
स्वच्छता का नियम कोरोना ने बतलाया,
हमें इसका पालन जरूर है करना ।
— स्व रचित
वर्ष 2020 में आई वैश्विक महामारी कोविड19 से सभी देशों की व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई । इस महामारी के कारण सामाजिक दूरी अर्थात जब किसी स्थल पर ज्यादा लोग एकत्रित हो तो लोगों को एक-दूसरे से दूरी बना कर रखनी है। इसी के साथ स्वच्छता का बोलबाला अधिक रहा कि जब किसी भी जगह से घर आएं तो हाथों को अच्छे से बीस सेकंड तक धोना व मास्क पहनना आदि आवश्यक हो गया।
इस वैश्विक महामारी ने सभी को स्वच्छता का नियम बतलाया और इस निष्ठुर समय में प्रत्येक जन अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ आस पास की जगह को भी स्वच्छ रखने का प्रयास करना चाहिए। यदि प्रत्येक जन स्व स्वच्छता के साथ सामाजिक स्वच्छता का भी ध्यान रखे तो अन्य घातक बीमारियों का खतरा कम हो जाएगा । यह कार्य अत्यंत सरल है केवल हमें सतर्क रहना है कि कोई भी अनभिज्ञ सतर्क रहना है कि चलते-चलते यत्र तत्र कूड़ा न फेंके, केवल कूड़ेदान में ही कूड़ा डालें। लेकिन यह एक विचित्र बात है कि कूड़ेदान में कूड़ा कम होता है और अधिक कूड़ा उस स्थल पर आस पास बिखरा रहता है जो अन्य पशुओं को आमंत्रित करता है व जिसके सेवन करने से पशु भी बीमार हो जाते हैं और कूड़ा दूर- दूर तक फैल जाता है। आज अधिकतर प्रदेशों में नगर परिषद द्वारा घरों से कूड़ा उठाने की व्यवस्था की गई है सभी को इस व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
कोविड 19 से बचाव के लिए हाथों को बीस सेकंड तक धो कर प्रत्येक कीटाणु को नष्ट कर देते हैं यदि ऐसे ही व्यक्ति केवल बीस मिनट घर से बाहर साफ सफाई हेतु दे तो हाथ रूपी प्रकृति भी निखर उठेगी, जिसकी छटा सदैव निराली बनी रहेगी। इस प्रकार भारत देश में सभी को वैश्विक महामारी का डट कर सामना करना है और साथ ही स्वच्छता की दिशा में भी कार्यरत रहना है।
"हो आवश्यक जब,
तो सारे सज संवर कर न चल देना,
किसी एक को ही इसका भार सौंपना।"
— स्व -रचित
वैश्विक महामारी से बचाव के लिए यह आवश्यक है कि सभी एक साथ अनावश्यक कार्यों के लिए घर से बाहर न निकलें। इस महामारी के आने से पहले सभी सद्स्य किसी न किसी पर्यटक स्थल पर घूमने जाते थे लेकिन आज यह स्थिति है कि केवल आवश्यक कार्यों हेतु घर का एक सदस्य घर से बाहर जाता और अन्य सदस्य मानो किसी अनिश्चित काल का गृहवास काट रहे हों ! लेकिन यह वर्तमान समय में सुरक्षा का नियम है व सभी को दृढ़ता से इसकी अनुपालना करनी चाहिए। सभी जन घर में रहकर आत्म केन्द्रित हुए वहीं आत्म-ज्ञान की ओर भी प्रवृत्त हो गए थे। आत्मानुभव करने पूर यह सामने आया कि अपनी स्वयं की सुरक्षा, और अन्य सभी जन की सुरक्षा इसी में है कि कोई भी अनावश्यक कार्य हेतु घर से बाहर न निकले व ऑनलाइन माध्यम से ऐसे कार्यों को पूरा करने का प्रयास करें । इसी प्रकार समाज की समुचित रूप से रक्षा संभव हो पाएगी।
कोविड 19 वैश्विक महामारी के लक्षण बिल्कुल सर्दी, जुकाम आदि से मिलते हैं। इसी के फलस्वरूप लोग ऐसे लक्षणों को साधारण मान लेते हैं, और स्वास्थ्य की अनदेखी कर बैठते हैं । यह आवश्यक है कि कोई भी लक्षण शरीर में दिखने से सबसे पहले अपने चिकित्सक से विचार - विमर्श करना चाहिए व जो भी दवाईयां बताई जाती हैं उनका सेवन बताए गए समय सीमा तक अवश्य करना चाहिए क्योंकि ऐसा न करने पर स्वास्थ्य में अधिक उतार - चढ़ाव देखना पड़ेगा।
कोविड 19 महामारी के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक प्रभाव देखा गया कि लोग इस रोग से ज्यादा इसके भय से अधिक पीड़ित हैं। इस परिस्थिति से बाहर आने के लिए हमें प्रतिदिन व्यायाम, योगासन आदि से अपने भीतर नव ऊर्जा का संचार करना चाहिए जो कठिन स्थितियों में हमें बल प्रदान करेगा।
“विपत्ति जब भी आती है, कायर को ही दहलाती है।
सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं।"
—'रामधारी सिंह दिनकर '
कोविड19 वैश्विक महामारी से बचाव हेतु जो भी जन कल्याण हेतु नियम बनाए गए हैं उनका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए व जब तक हम सभी इस महामारी का डट के सामना कर रहे हैं उसी के साथ-साथ स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए व ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा अस्वस्थ व्यक्ति का हौंसला बढ़ाना चाहिए।
स्व-रचित निबंध वर्तमान समय में आपातकालीन परिस्थिति में जाने से बचा जा सकता है यदि हम इस समय स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।🙏🏻🙏🏻
![]() |
| Get yourself vaccinated it's safe.👍 |

👌👌
ReplyDelete