नज़र...

 



है कौन ये नज़र?

जिसको भी लग जाए वह डूब जाए,

मेहनत का फल उसको नज़र न आए,

आगे पहुंच कर भी वह पीछे रह जाए,

लौट कर घर वह खाली हाथ आए।

मेहनत करो तुम इतनी निष्ठुर,

कि नज़र भी तुम्हारे आगे झुक जाए।


—स्वरचित पंक्तियां —


समाज में कुछ कुरीतियों से प्रत्येक व्यक्ति को गुजरना पड़ता है और हमें मिथ्या के जाल में न फंसकर सदैव कार्य जगत में संलग्न रहना चाहिए और ईंट का ज़वाब पत्थर से देना चाहिए।

कर्म ही सत्य है,शाश्वत है।

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