दिमाग में चक्कर काट गई एक बात, क्यों लोग करते पीछे से बात, क्यों वे करते बात टेढ़ी खीर से, क्यों नहीं कहते हैं वे साफ दिल से। दिमाग में चक्कर काट गई एक बात, क्यों लोग दूसरों की खुशी में खुश नहीं होते, क्यों दुःख में सबको झूठी संवेदना हैं देते, क्या इतनी स्वाभीमानी है मानवता, क्या कलियुग है जिम्मेवार जो, झूठी शान का प्रदर्शन हैं करते। दिमाग में चक्कर काट गई एक बात, क्यों लोग जाने समझे बिना अपनी राय देते, क्यों लोग दूसरों से वैर हैं करते, क्यों लोग जीवन सरल सलीके से न जीते, क्यों लोग माया जाल में फँसकर रह जाते ? यह अहं मनुष्य का करता नाश, जिसके कारण करता अपने जीवन का विनाश, जीवन है दूसरों का दूर करना कष्ट, जिससे मिलती असीम खुशी वह काम है सर्वश्रेष्ठ। नकारात्मक सोच करती उथल-पुथल जीवन में, देती है भटका हमें अपने लक्ष्य से जीवन में, यह बातें हमारा दिमाग कर लेती हैं वश में, मनुष्य को सोचने न दे आगे जीवन में। नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति रह जाता अकेला जीवन में, न कोई खुशी केवल गम ही गम है जीवन में, मस्त रहता वह अपने अकेलेपन के जीवन में, परन्तु रह जाता अकेला जी...
A 32 line poem on scenario what being seen around in the nature's territory during lockdown.🌄🏞️ A year ago, I saw a choking nature, Was playing like its an adventure, Nature which we are passing to generations, Been trapped in developed nations. Our mistake is extreme use of it, New science ruptured it, Traditional was healing it, but New generation was destroying it. Lacking past to pass the message 'the world is one family', We lacks the dignity, In ours to import a great sense. The custom we forget, Of worshipping our nature, We did always opposite, What being asked to do. Nature got oppressed, By the activities we do. She was preparing to, Get herself healed, Sometime ago a boon came, Separates the working groups, Man the finest being. Was treated below the nature. Nature got relaxed, Breathed in a free world, Clean air and water everywhere, Nature enjoyed a treat in every nation. The nature took revenge, Man learnt to use less, Let the n...
खिलाड़ी — चैंपियन के खून को बनाया जाता है चैंपियन: खेल किसी के खून में नहीं होता, कठोर वह स्वयं को इतना बनाता, बड़े से बड़ा खिलाड़ी पस्त हो जाता, कोशिश वह इतनी करता, हार कर भी न पीछे मुड़ता, मग्न हो जाता वह इतना, कि छोड़कर सांसारिक जीवन, वह खेल को अपनाता, व विश्व नंबर एक बन जाता, जीवन की आकांक्षाएं त्यागता, बस ओलंपिक में गोल्ड लाना, उसका परम ध्येय रह जाता। *** Tokyo Olympics 2020🙌🇮🇳🇮🇳🇮🇳 खेल के महाकुंभ ओलंपिक खेलों में पूरे विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी अपनी स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ देते हैं। समाज को पता होना चाहिए की चार वर्षों में होने वाले इन खेलों में कोई भी अपना प्रदर्शन खराब नहीं करता केवल कुछ तकनीकी कठिनाई व एकाग्रता भंग होने से एक खिलाड़ी की वर्षों की साधना मानो एक झटके में छिन्न भिन्न हो जाती है। देशवासियों को खिलाड़ियों का सकारात्मक दिशा में मनोबल बढ़ाना चाहिए व उन्हें और ऊंचे शिखर पर चढ़ने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए। स्वयं एक खिलाड़ी होते हुए मैंने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है और ये पंक्तियां मैंने 7 सितंबर 2018 को लिखी थीं। आज खेलों के शुभ अवसर पर...
Creative one👍👍
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